अनजान पथ पर
भटकते हुए फिर
गुमशुदा ख्याल आया
मखमली जिस्म और गेसुओ
की सौगात आज
फिर याद आया
हम तो भटके थे उस राह में
फिर दुबारा हमें आज फिर वो
ख्याल आया -------
करवटे बदल रही है
रूहे शबनम कोई ----
जमी से भटक कर
अब --आसमान से हो आया ---
अनजान पथ पर
भटकते हुए फिर
गुमशुदा ख्याल आया
सूरज जब चरम पर होता है
दिशाए भ्रमित करती है मुझे
सोंचता हूँ --तपन की आंच
और
स्नेहिल स्पर्श क्या होता है ---?
वक्त गुजरता है -----
अति आधुनिक हो चले हम और तुम
सूरज के अंतिम लम्हों तक
साथ चलने की कोशिश करते है
गंभीर होते समय के बीच
मुझे बहती दोपहर में
पलो को अपनों से ही
क़त्ल होते देखता हूँ ----?