Tuesday, October 4, 2011

वीरान समय

वीरान समय का जिक्र
जब कभी आया -----
सच तुम्हारा साया
तभी नजर आया ------
लोग कहते है की
साया अस्तित्व से
अलग नहीं होता
मुझे पता है ----
सूरज जब चरम पर होता है
साया भी बढ़ा होता है ---
कम रोशनी
कद को घटा देती है
फिर वीरान समय
की बात -----?
दरकता है समय का
वो चक्र भी ---
जब सुरमई शाम
योवन पर होती है -----
आयता कार आकार में
साए का कद नहीं देख पाता हूं ---
सच है ----
वीरान समय का जिक्र
जब कभी आया -----
सच तुम्हारा साया
तभी नजर आया ------?????????????

4 comments:

  1. कल 17/10/2011 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  2. सुन्दर प्रस्तुति ....

    जब सूरज चरम पर होता है तो साया छोटा होता है ... बाकी समय साया बड़ा होता है कद घट जाता है ...

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