Thursday, July 21, 2011

रुदाली


आज मन व्यथित है फिर क्यों 
एक रुदाली को देखा जब  मेने  ---
आधुनिक हो चले जब से तुम -हम 
सदिया बीती ---वंश बदले 
बदले हर मोसम के रंग ----
प्रान्तं हर
 दिशा वही बस एक राह 
पर -----
भिन्न परिवेश --------------
रीति रिवाजो की देहरी पर 
मूक हो चले अब तुम- हम 
पाषाणों की दुनिया में 
एक अलबेली रुदाली की धड़कन 
आज व्यथित मन अचानक मिलता है 
जा कर जब उसके द्वार -------
-एक रिदम है 
एक ही जीवन -
-एक सा सपनो का संसार 
पेट की पीड़ा मन का कंम्पन 
और निरीह है परिवार ---
पता नहीं ऐसे में क्यों मै
कंम्पन को पढता हूँ ---
कंम्पन  में  भी फिर कुछ 
थिरकन  सी हो जाती है 
बिम्बित होते इन कंम्पन  में 
आज मुझे रुदाली फिर 
क्यों याद आती है ---
प्रासंगिक  नहीं फिर भी 
मुझ में  वो तार्किक सी  हो जाती है 
और मै मूक  हो करके 
स्वीकृति सी दे जाता हूँ ---
आज मुझे फिर रुदाली फिर बहुत 
प्रासंगिक सी लग जाती है -----
आज मुझे फिर क्यों -----
रुदाली प्रासंगिक सी लग जाती है ------...

3 comments:

  1. Amit Gaur very nice Ravindra Shukla ji.
    बुधवार को 11:11 बजे · पसंद करें

    Chandra Vig आदमी को आदमी बनाने के लिए छोटी सी एक प्रेम कहानी चाहिए ! काग़ज़ , कलम या सियाही नहीं , बस थोडा सा आँखों में पानी चाहिए !
    G8 Shukla ji.
    बुधवार को 11:21 बजे · पसंद करें · 2 लोग
    Ravindra Shukla aabhar amit ji --
    बुधवार को 11:22 बजे · पसंद करें · एक व्यक्ति
    Ravindra Shukla vig sir aap ke comment shakti dete hai ---aabhaar---sir
    बुधवार को 11:23 बजे · पसंद करें · 2 लोग

    Manoj Chhabra aansoo bana samander...
    बुधवार को 12:22 बजे · पसंद करें
    Ravindra Shukla manoj ji abhinandan aap kaa ----
    बुधवार को 12:48 बजे · पसंद करें · एक व्यक्ति

    Madan Singh Chouhan Ati sunder, sir ji...
    Jis chehre ko dekhkar haste the hum,
    aaj usine rula diya......
    Khud ne to kabhi ikrar kiya nahi,
    humne kiya to.....
    Ek pal me bhula diya.........
    बुधवार को 16:20 बजे · पसंद करें

    Ashish Tandon वाह क्या बात है बहुत खूब सर
    बुधवार को 17:49 बजे · नापसंद करें · एक व्यक्ति

    दिनेश मिश्र बेहतरीन .............!!
    बुधवार को 18:20 बजे · नापसंद करें · एक व्यक्ति
    Ravindra Shukla sabhi mitro kaa aabhar ---
    बुधवार को 18:44 बजे · पसंद करें

    Avadh Ram Pandey बहुत सुन्दर पंक्तियां! और प्रस्तुती!
    बुधवार को 19:43 बजे · नापसंद करें · एक व्यक्ति

    Bhuwnesh Prabhu Joshi Love gurukul....ravi sir , master hai jee!!

    Anubhutio ko shabd shakti se khich lana aapse sikhna jaruri ho gaya hai

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